दोस्तों!...हार... :- यह शब्द सुनते ही अधिकतर लोगों के मन में एक अजीब-सा डर, निराशा और थकान उतर आती है। लेकिन सच यह है कि हार खुद में कोई समस्या नहीं है। समस्या तब पैदा होती है, जब हम हार को अपनी अंतिम पहचान मान लेते हैं। जब हम यह मान लेते हैं कि अब आगे कुछ नहीं बचा। असली गलती गिरना नहीं होती, असली गलती वहीं गिरकर बैठ जाना होती है। और उससे भी बड़ी गलती है हार मान लेना।
इस दुनिया में आज जितने भी सफल लोग हैं, उन्होंने हार को कभी पूजा नहीं, लेकिन उन्होंने हार से भागा भी नहीं। उन्होंने हार को सीखा, समझा और उसे सीढ़ी बना लिया। लेकिन जो लोग बीच रास्ते में रुक गए, जो लोग डर के कारण पीछे हट गए, जो लोग यह कह बैठे कि अब मुझसे नहीं होगा, वही लोग जीवन की सबसे बड़ी गलती कर बैठे हार मान लेना इसलिए सबसे बड़ी गलती है क्योंकि यह इंसान की अंदर की शक्ति को मार देता है। इंसान बाहर से नहीं टूटता, वह अंदर से टूटता है। जब मन मान लेता है कि अब नहीं हो सकता, तभी सब खत्म हो जाता है। वरना शरीर तो आखिरी सांस तक साथ देने को तैयार रहता है।
ज़रा सोचिए, जब कोई बच्चा चलना सीखता है, तो वह कितनी बार गिरता है। क्या वह एक बार गिरने के बाद यह कह देता है कि मुझसे नहीं होगा? नहीं। वह गिरता है, रोता है, फिर उठता है और दोबारा कोशिश करता है। अगर वह भी हार मान लेता, तो आज हम चलना भी नहीं सीख पाते समस्या यह है कि जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हमारा डर बड़ा हो जाता है और हमारा साहस छोटा। हम असफलता से इतना डरने लगते हैं कि कोशिश करना ही छोड़ देते हैं। हम दूसरों की बातें, ताने, तुलना और समाज की सोच को अपने ऊपर हावी होने देते हैं। और फिर एक दिन चुपचाप हार मान लेते हैं।
हार मान लेना इसलिए खतरनाक है क्योंकि यह धीरे-धीरे हमारे सपनों को मार देता है। पहले हम बड़े सपने देखते हैं, फिर थोड़े छोटे, फिर और छोटे और अंत में कहना शुरू कर देते हैं चलो जो है, वही ठीक है। यही सबसे बड़ा धोखा है जो इंसान खुद से करता है। हर मुश्किल आपको तोड़ने नहीं आती, कुछ मुश्किलें आपको मजबूत बनाने आती हैं। हर अंधेरा आपको डराने नहीं आता, कुछ अंधेरे आपको आपकी रोशनी का एहसास कराने आते हैं। लेकिन जो इंसान डरकर पीछे हट जाता है, वह कभी नहीं जान पाता कि वह कितनी दूर तक जा सकता था।
याद रखिए, हार मान लेना आसान है, लेकिन उसी हार के सामने खड़े रहना और कहना कि मैं अभी खत्म नहीं हुआ, यही असली हिम्मत है। दुनिया उन्हीं को याद रखती है जो हारने के बाद भी खड़े हो जाते हैं। बहुत बार जीवन में ऐसा समय आता है जब लगता है कि सब कुछ हमारे खिलाफ है। मेहनत करते हैं, फिर भी नतीजा नहीं मिलता। दिल लगाकर कोशिश करते हैं, फिर भी लोग धोखा दे जाते हैं। तब मन कहता है छोड़ो, अब बस। लेकिन उसी पल अगर आप रुक गए, तो आपकी कहानी वहीं खत्म हो जाएगी।सफलता अक्सर आखिरी मोड़ के बाद मिलती है। लेकिन अधिकतर लोग उस मोड़ से ठीक पहले हार मान लेते हैं। उन्हें लगता है कि अब आगे कुछ नहीं है, जबकि सच्चाई यह होती है कि बस एक कदम और चलना बाकी होता है।
हार मान लेने वाला इंसान अपने हालात को दोष देता है, लेकिन आगे बढ़ने वाला इंसान हालात को बदल देता है। फर्क हालात में नहीं, सोच में होता है। जब सोच मजबूत होती है, तो हालात झुकने लगते हैं। आपके जीवन की कीमत आपकी सबसे बुरी असफलता से तय नहीं होती, बल्कि आपकी सबसे मजबूत वापसी से तय होती है। जो इंसान गिरकर फिर उठता है, वही असली विजेता होता है।
कभी-कभी भगवान या किस्मत आपको रोकती नहीं, बल्कि आपकी परीक्षा लेती है। वह देखना चाहती है कि आप सच में अपने सपनों के लिए कितने गंभीर हैं। अगर आप पहली मुश्किल में ही हार मान लेते हैं, तो यह साबित हो जाता है कि आप खुद भी अपने सपनों पर भरोसा नहीं करते।याद रखिए, हार मान लेने से पहले आपके अंदर जो आवाज़ कहती है बस एक बार और कोशिश कर ले, वही आपकी असली ताकत होती है। उसी आवाज़ को दबाना सबसे बड़ी गलती है।
जिन रास्तों पर भीड़ चलती है, वहा सिर्फ औसत लोग मिलते हैं। जो अलग रास्ता चुनते हैं, वही इतिहास बनाते हैं। और अलग रास्ता चुनने वाले लोगों को सबसे ज़्यादा असफलताए मिलती हैं। लेकिन वही असफलताए उन्हें खास बनाती हैं। अगर आज आप थके हुए हैं, तो आराम कीजिए लेकिन हार मत मानिए। थक जाना कमजोरी नहीं है, लेकिन कोशिश छोड़ देना कमजोरी है।याद रखिए, समय सब बदल देता है। आज जो आपको असंभव लग रहा है, वही कल आपकी पहचान बन सकता है। लेकिन इसके लिए आपको आज हार नहीं माननी होगी।
खुद से यह वादा कीजिए कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, आप अपने सपनों से समझौता नहीं करेंगे। आप धीरे चलेंगे, लेकिन रुकेंगे नहीं। आप गिरेंगे, लेकिन उठेंगे ज़रूर। जो इंसान हार मान लेता है, वह दूसरों के फैसलों का गुलाम बन जाता है। और जो इंसान डटा रहता है, वही अपनी तक़दीर खुद लिखता है।आज अगर जीवन आपको तोड़ रहा है, तो समझ लीजिए कि आप बनने वाले हैं। क्योंकि जो लोग टूटने से डर जाते हैं, वे कभी बन नहीं पाते।
हार मान लेना सबसे बड़ी गलती इसलिए है क्योंकि यह आपको उस इंसान से दूर कर देता है, जो आप बन सकते थे।इसलिए जब भी लगे कि अब नहीं हो पाएगा, तब अपने आप से बस इतना कहिए अभी नहीं, लेकिन मैं हार नहीं मानूगा।
यही सोच आपको आगे ले जाएगी, यही सोच आपको मजबूत बनाएगी, और यही सोच एक दिन आपको वहा पहुचाएगी, जहा आज आप सिर्फ सपना देख रहे हैं। आज से अपनी हार को बंद मुठ्ठी में जकड़ लो और दौड़ पढ़ो अपनी जीत की ओर कोई तुम्हें रोक नहीं सकता।
कोई टिप्पणी नहीं