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थकान सिर्फ शरीर की होती है, आत्मा की नहीं।

जीवन की राह पर चलते-चलते जब कदम धीमे पड़ जाते हैं, सांसें भारी लगने लगती हैं, और मन कहता है कि अब बस यहीं रुक जाओ तब हमें लगता है कि हम थक चुके हैं। हम समझ लेते हैं कि अब आगे बढ़ना संभव नहीं। लेकिन सच्चाई यह है कि थकान सिर्फ शरीर की होती है, आत्मा की नहीं। शरीर मिट्टी से बना है, उसे आराम चाहिए, उसे विराम चाहिए; लेकिन आत्मा वह तो अग्नि है, प्रकाश है, अनंत ऊर्जा का स्रोत है। उसे थकान नहीं आती, उसे हार मानना नहीं आता, उसे सिर्फ आगे बढ़ना आता है।

जब कोई व्यक्ति कहता है कि मैं थक गया हू, तो अक्सर उसका मतलब होता है कि उसका शरीर थक गया है, उसकी मांसपेशिया थक गई हैं, उसका दिमाग़ बोझिल हो गया है। परंतु उसकी आत्मा वह अब भी भीतर से आवाज़ दे रही होती है तू कर सकता है उठ फिर चल। आत्मा का स्वर बहुत धीमा होता है, पर वह सत्य होता है। शरीर का शोर बड़ा होता है, पर वह क्षणिक होता है। इसलिए जो लोग जीवन में महान बनते हैं, वे शरीर की थकान को सुनते जरूर हैं, लेकिन आत्मा की पुकार को मानते हैं।

सोचिए, अगर थकान सचमुच हमारी असली शक्ति को खत्म कर देती, तो कोई पर्वतारोही पहाड़ की चोटी तक नहीं पहुचता, कोई खिलाड़ी आखिरी सेकंड तक संघर्ष नहीं करता, कोई विद्यार्थी कठिन परीक्षा की तैयारी में रातें नहीं जगता। ये सब लोग भी थकते हैं, दर्द सहते हैं, कभी-कभी टूट भी जाते हैं, लेकिन वे जानते हैं कि उनकी असली ताकत शरीर नहीं, उनकी आत्मा है। आत्मा वह शक्ति है जो कहती है जब तक लक्ष्य न मिले, तब तक रुकना मत।

जीवन में थकान आना गलत नहीं है। थकान आना यह प्रमाण है कि आप प्रयास कर रहे हैं। जो व्यक्ति कुछ करता ही नहीं, उसे थकान कैसी? इसलिए जब आप थकें, तो निराश मत हों। खुद से कहें मैं थका हू, हारा नहीं हू। थकान विश्राम मागती है, हार समर्पण मागती है। और याद रखिए, विश्राम लेना कमजोरी नहीं, बुद्धिमानी है। जैसे धनुष की डोरी को पीछे खींचा जाता है तभी तीर आगे जाता है, वैसे ही थोड़ा ठहरना ही आगे बढ़ने की तैयारी होता है।

हमारी सबसे बड़ी गलती यह होती है कि हम शरीर की थकान को आत्मा की हार समझ लेते हैं। हम सोचते हैं कि अब हममें शक्ति नहीं बची, अब हम सक्षम नहीं रहे। जबकि सच यह है कि हमारी आत्मा में ऊर्जा का सागर छिपा होता है। बस हमें उस सागर तक पहुचना होता है। और उस तक पहुचने का रास्ता है विश्वास। अपने ऊपर विश्वास, अपने सपनों पर विश्वास, और उस ईश्वर पर विश्वास जिसने हमें इस दुनिया में किसी उद्देश्य से भेजा है।

जब भी आपको लगे कि आप टूट रहे हैं, आखें बंद कीजिए और अपने भीतर झाकिए। आपको वहा एक छोटी-सी लौ दिखाई देगी वही आपकी आत्मा है। आधी आए, तूफ़ान आए, परिस्थितिया बिगड़ें वह लौ बुझती नहीं। हा, कभी-कभी धीमी जरूर हो जाती है, पर खत्म नहीं होती। आपका काम है उसे हवा देना सकारात्मक विचारों से, अच्छे कर्मों से, और दृढ़ संकल्प से। जैसे ही आप ऐसा करेंगे, वह लौ फिर भड़क उठेगी और आपका रास्ता रोशन कर देगी।

जीवन में सफलता पाने वाले लोग कोई अलग दुनिया से नहीं आते। वे भी हमारे जैसे ही होते हैं वही शरीर, वही सीमाए, वही परेशानिया। फर्क सिर्फ इतना होता है कि जब उनका शरीर कहता है अब नहीं, तो उनकी आत्मा कहती है बस थोड़ा और। यही थोड़ा और उन्हें साधारण से असाधारण बना देता है। यही थोड़ा और उन्हें भीड़ से अलग खड़ा कर देता है।

आपने देखा होगा कि जब कोई धावक दौड़ते-दौड़ते थक जाता है, तब भी वह आखिरी रेखा तक पहुचने के लिए पूरी ताकत लगा देता है। उस समय उसके पैर दर्द कर रहे होते हैं, सांस तेज चल रही होती है, लेकिन उसके अंदर की आवाज़ उसे धक्का देती है बस कुछ कदम और। वही आवाज़ हमारी आत्मा की है। वह हमें हारने नहीं देती, वह हमें गिरने के बाद उठना सिखाती है, वह हमें अंधेरे में भी उम्मीद दिखाती है।

आज की दुनिया में लोग जल्दी हार मान लेते हैं। थोड़ी-सी परेशानी आई नहीं कि वे कह देते हैं मेरे बस की बात नहीं।” पर सच तो यह है कि बस की बात तो है, बस विश्वास की बात नहीं है। जब विश्वास जाग जाता है, तब थका हुआ शरीर भी चमत्कार कर सकता है। इतिहास गवाह है कि जिन्होंने दुनिया बदली, वे आरामकुर्सी पर बैठकर नहीं बदले  वे संघर्ष में थे, थकते थे, गिरते थे, पर रुकते नहीं थे।

इसलिए जब जीवन आपको थका दे, तो खुद को दोष मत दीजिए। खुद को याद दिलाइए मैं इंसान हू, मशीन नहीं। थकना स्वाभाविक है। लेकिन साथ ही यह भी कहिए मेरी आत्मा असीम है, वह कभी नहीं थकती। यही विचार आपको फिर खड़ा कर देगा। यही विचार आपको फिर चलने की ताकत देगा।

सकारात्मक ऊर्जा का रहस्य यही है कि हम अपने भीतर की आवाज़ को सुनना सीखें। जब हम बार-बार नकारात्मक बातें सोचते हैं मैं नहीं कर सकता, मुझसे नहीं होगा, मेरी किस्मत खराब है तब हम अपनी आत्मा की आवाज़ को दबा देते हैं। लेकिन जैसे ही हम सोचते हैं मैं कोशिश करूंगा, मैं सीख सकता हू,मैं फिर उठ सकता हू। तब हमारी आत्मा की शक्ति जाग जाती है। और जब आत्मा जागती है, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

याद रखिए, थकान मंज़िल का अंत नहीं, मंज़िल का संकेत है। वह बताती है कि आप रास्ते पर हैं, आप चल रहे हैं, आप प्रयास कर रहे हैं। इसलिए थकान से डरना नहीं, उसे समझना है। उसे स्वीकार करना है, और फिर मुस्कुराकर आगे बढ़ना है। क्योंकि जो व्यक्ति थकान को समझ लेता है, वह जीवन को समझ लेता है।

आपका जीवन एक यात्रा है, दौड़ नहीं। यहा सबसे तेज भागने वाला नहीं, सबसे लंबे समय तक टिकने वाला जीतता है। और टिक वही सकता है, जो अपनी आत्मा से जुड़ा हो। जब आत्मा मजबूत होती है, तब परिस्थितिया कमजोर पड़ जाती हैं। जब आत्मा जागृत होती है, तब असफलता भी शिक्षक बन जाती है। जब आत्मा प्रबल होती है, तब हर कठिनाई अवसर में बदल जाती है।

इसलिए आज, अभी, इसी क्षण खुद से एक वादा कीजिए चाहे शरीर थक जाए, चाहे रास्ता लंबा लगे, चाहे दुनिया साथ छोड़े मैं अपनी आत्मा की आवाज़ नहीं छोड़ूगा। मैं रुकूगा नहीं, झुकूगा नहीं, टूटूगा नहीं। क्योंकि मैं जानता हू कि मेरी असली ताकत मेरे भीतर है, और वह कभी समाप्त नहीं होती।

अंत में बस इतना याद रखिए सूरज भी हर शाम थककर ढलता है, पर अगली सुबह फिर पूरी रोशनी के साथ लौटता है। उसी तरह आप भी चाहे जितना थक जाए, यह अंत नहीं है। यह सिर्फ एक विराम है, एक ठहराव है, ताकि आप फिर नई ऊर्जा के साथ उठ सकें। आपकी आत्मा आपका सूरज है वह कभी अस्त नहीं होती।

तो उठिए, मुस्कुराइए, गहरी सांस लीजिए, और आगे बढ़िए। क्योंकि थकान सिर्फ शरीर की होती है आत्मा की नहीं।

आज से हर मिनट, हर दिन सिर्फ और सिर्फ आगे बढ़ने का सोचो। जो आगे बढते है वो कभी रुकते नहीं और जो रोकने का सोचते है वो कभी आगे बढते नहीं।

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